
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
यह मामला पहले सबूतों के अभाव में बंद हो गया था और अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को दोबारा हाईकोर्ट में खोला गया। जांच एजेंसी सीबीआई ने करीब 11 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसके आधार पर अदालत ने दोबारा सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में हत्या से जुड़े पर्याप्त सबूत होने का दावा किया। दूसरी ओर, फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने इसे अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि उन्हें पूरी तरह सुनवाई का मौका नहीं मिला और उनके साथ अन्याय हुआ है।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से अधिकांश को सजा हो चुकी है, जबकि कुछ लोग सरकारी गवाह बन गए थे। 2007 में विशेष अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनः हाईकोर्ट भेज दिया।
रामावतार जग्गी, जो कारोबारी पृष्ठभूमि से थे, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और एनसीपी में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे।
इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहे इस चर्चित हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।




