12वीं बोर्ड फर्जीवाड़ा केस में बड़ा फैसला: पोरा बाई समेत 4 दोषियों को 5-5 साल की सजा

जांजगीर-चांपा। साल 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में हुए बहुचर्चित फर्जीवाड़े के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला आया। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जांजगीर श्री जी.आर. पटेल ने मुख्य आरोपी पोरा बाई सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने दिसंबर 2020 में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन राज्य शासन की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया।
प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2008 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं बोर्ड परीक्षा में पोरा बाई ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा के रूप में सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र बिर्रा से परीक्षा दी थी। 26 मई 2008 को जारी परिणाम में उसे मेरिट सूची में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। इस पर संदेह होने पर माध्यमिक शिक्षा मंडल के तत्कालीन सचिव ने जांच करवाई, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी, फर्जी प्रवेश और जालसाजी की पुष्टि हुई।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर बम्हनीडीह थाना में पोरा बाई सहित कई अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया। विवेचना के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत हुआ।
अपील पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने मुख्य आरोपी पोरा बाई, केंद्राध्यक्ष फूलसाय नृसिंह, प्राचार्य एस.एल. जाटव और दीपक सिंह जाटव को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120बी के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने प्रत्येक आरोपी को सभी धाराओं में 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 20,000 रुपये जुर्माने से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।




