छत्तीसगढ़बिलासपुरमस्तूरी

औद्योगिक इकाई पर गंभीर आरोपों की बौछार पर्यावरण, श्रमिक और ग्रामीण हितों के उल्लंघन का मामला

युवा कांग्रेस ने SDM से की शिकायत, राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड पर जांच की मांग

महेंद्र सिंह राय बिलासपुर, 9 जनवरी 26। जिले के मस्तूरी तहसील अंतर्गत पाराघाट क्षेत्र में संचालित राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। जिला युवा कांग्रेस बिलासपुर (ग्रामीण) ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मस्तूरी को लिखित शिकायत सौंपते हुए औद्योगिक इकाई पर पर्यावरण संरक्षण नियमों, श्रमिक अधिकारों और ग्रामीण हितों के खुले उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह शिकायत जिला युवा कांग्रेस (ग्रामीण) के कार्यकारी जिलाध्यक्ष सुनील पटेल के हस्ताक्षर से सौंपी गई है। शिकायत में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं SDM कार्यालय घेराव जैसे कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।

शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप (बिंदुवार):

1. बिना वैधानिक अनुमति कोल वॉशरी का संचालन

शिकायत के अनुसार औद्योगिक इकाई द्वारा आवश्यक वैधानिक अनुमति एवं NOC की स्थिति स्पष्ट किए बिना कोल वॉशरी का संचालन किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

2. लीलागर नदी के जल पर संकट

औद्योगिक गतिविधियों के कारण लीलागर नदी के जल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इससे आसपास के ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर सीधा खतरा उत्पन्न हो रहा है।

3. श्रमिकों के PF में अनियमितता का आरोप

कंपनी द्वारा कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (PF) के नाम पर कुल 24 प्रतिशत राशि की कटौती तो की जा रही है, लेकिन उक्त राशि संबंधित खातों में जमा की जा रही है या नहीं, इसे लेकर गंभीर संदेह और पारदर्शिता का अभाव बताया गया है।

4. CSR केवल कागजों तक सीमित?

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मूलभूत सुविधाओं के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं दिखाई देता।

निष्पक्ष जांच की मांग

जिला युवा कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कंपनी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण, श्रमिकों और ग्रामीणों के हितों की रक्षा हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!