छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

सरल प्रक्रिया, समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाओं से किसानों को मिल रहा है लाभ

जांजगीर-चांपा 23 जनवरी 2026/ कभी धान बेचने के लिए लंबी कतारें, असमय भुगतान और अनिश्चितता किसान की मजबूरी हुआ करती थी। लेकिन आज वही किसान आत्मविश्वास के साथ मुस्कुरा रहा है। यह बदलाव केवल व्यवस्था का नहीं, बल्कि किसान के जीवन में लौटे सम्मान और भरोसे का प्रतीक है। और यह संभव हो पाया है मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हो रही धान खरीदी और उनकी किसान हितैषी नीतियों के वजह से। जिले के ग्राम पेंड्री निवासी किसान श्री कुलन्दन सूर्यवंशी की कहानी छत्तीसगढ़ में लागू की गई पारदर्शी और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है। उन्होंने उपार्जन केंद्र पेंड्री में 17.20 क्विंटल धान का विक्रय किया और महसूस किया कि अब किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि सम्मान का भागीदार है।

किसान श्री सूर्यवंशी बताते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वाधिक समर्थन मूल्य मिलना, उनके लिए सिर्फ एक आर्थिक लाभ नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत का सच्चा मूल्य है। साथ ही प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की सुविधा ने उनकी आमदनी के साथ संबल प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि अब धान बेचने की प्रक्रिया डर और भ्रम की नहीं, बल्कि विश्वास और सुविधा की है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली, डिजिटल तौल कांटा, माइक्रो एटीएम से भुगतान, समय पर टोकन कटाई और त्वरित भुगतान इन सभी व्यवस्थाओं ने किसान के समय, श्रम और सम्मान की रक्षा की है। धान लाने से लेकर भुगतान तक हर चरण सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद हो गया है। उपार्जन केंद्र पर पर्याप्त बारदाना, स्वच्छ पेयजल, बैठने की व्यवस्था और छायादार स्थान जैसी सुविधाओं ने किसानों को यह अहसास कराया कि शासन उनके साथ खड़ा है। श्री सूर्यवंशी कहते हैं कि पहले जिन कठिनाइयों से गुजरना पड़ता था, वे अब बीते दिनों की बात हो गई हैं।

समय पर भुगतान मिलने से अब वे अगली फसल की तैयारी, बच्चों की शिक्षा और परिवार की जरूरतों की योजना आत्मविश्वास के साथ बना पा रहे हैं। यह व्यवस्था केवल धान खरीदने तक सीमित नहीं, बल्कि किसान को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। श्री कुलन्दन सूर्यवंशी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते कहते है कि आज छत्तीसगढ़ का किसान खुद को असहाय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर महसूस कर रहा है। शासन की किसान-हितैषी नीतियों ने हमारे जीवन में उम्मीद, उत्साह और खुशहाली भर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!