
पामगढ़, 10 अक्टूबर 25। पामगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नवीन भवन इन दिनों खुद बीमारियों का केंद्र बन गया है। अस्पताल परिसर के चारों ओर फैली गंदगी, बजबजाती नालियां, खुले में बायोमेडिकल वेस्ट और कचरे के ढेर प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ संक्रमण के खतरे से भी जूझना पड़ रहा है।
चारों ओर फैली गंदगी, मच्छरों का आतंक
अस्पताल परिसर के नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। वार्ड और गलियारे भी सफाई के अभाव में बदहाल हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराने से पहले गंदगी और बदबू से बचना बड़ी चुनौती बन गया है।
खुले में बायोमेडिकल वेस्ट – नियमों का खुला उल्लंघन
अस्पताल परिसर में स्थित पैथोलॉजी लैब के पास इस्तेमाल की गई सिरिंजें, टीबी मरीजों के थूक वाले कंटेनर और अन्य चिकित्सा अपशिष्ट खुले में फेंके जा रहे हैं। यह न केवल बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का उल्लंघन है बल्कि डेंगू, मलेरिया और टीबी जैसी बीमारियों को फैलाने का खतरा भी बढ़ा रहा है।
बीएमओ और बीपीएम की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सौरभ यादव और विकास खंड कार्यक्रम प्रबंधक अमित शुक्ला केवल अपने दफ्तरों में बैठकर काम निपटाने में व्यस्त रहते हैं। अस्पताल परिसर की जमीनी स्थिति देखने की उन्हें फुर्सत नहीं है। जनता का कहना है कि जहां अधिकारी का कक्ष साफ-सुथरा रहता है, वहीं मरीजों के वार्ड और परिसर गंदगी से पटे हुए हैं।
बीमारियों के फैलने का बढ़ा खतरा
पुराने अस्पताल भवन और परिसर के आसपास खुले में फेंके जा रहे अपशिष्ट से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य केंद्र के आसपास के वार्डों में डेंगू और मलेरिया के मामलों में वृद्धि होने की भी चर्चा है।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान
अमित शुक्ला, विकास खंड कार्यक्रम प्रबंधक, पामगढ़:
नगर पंचायत पामगढ़ से सफाई कर्मचारी बुलाए थे। अगर सफाई ठीक से नहीं हुई है तो कल सुबह फिर से बुलाकर साफ करवा दूंगा।
डॉ. सौरभ यादव, प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी, पामगढ़:
नगर पंचायत पामगढ़ के सीएमओ को नाली सफाई के लिए कहा गया था। सफाईकर्मी ने हल्की सफाई की थी, जिसे दोबारा कराने के निर्देश दिए गए हैं। हर हफ्ते नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय जनता अब जिला प्रशासन से मांग कर रही है कि अस्पताल परिसर की नियमित सफाई, कचरा निस्तारण और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि स्वास्थ्य केंद्र वास्तव में स्वास्थ्य का केंद्र बन सके — बीमारी का नहीं।




