छत्तीसगढ़बिलासपुर

लीज समाप्त होने के बाद कब्जे का अधिकार नहीं, रेलवे को जमीन वापस लेने का हक – हाई कोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेलवे भूमि से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि लीज अवधि समाप्त होने के बाद बिना वैध नवीनीकरण के रेलवे की जमीन पर कब्जा बनाए रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर दीपचंद कछवाहा द्वारा दायर रिट अपील को खारिज कर दिया।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया।

मामला क्या था

अपीलकर्ता दीपचंद कछवाहा बिलासपुर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में स्थित अनंता होटल परिसर में व्यवसाय कर रहे थे। उन्होंने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों द्वारा की जा रही बेदखली कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इससे पूर्व 15 जनवरी 2026 को एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ यह रिट अपील प्रस्तुत की गई।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत को अवगत कराया कि इसी तरह का मामला पहले भी निस्तारित किया जा चुका है।

हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता के पास कोई वैध, पंजीकृत और प्रभावी लीज नहीं है। केवल किराया या टैक्स जमा करने से किसी प्रकार का कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं होता। अदालत ने कहा कि लीज समाप्त होने और उसका नवीनीकरण न होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति अनधिकृत कब्जेदार माना जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि रेलवे भूमि केंद्र सरकार की संपत्ति है और उस पर अवैध कब्जे हटाना रेलवे का वैधानिक दायित्व है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि रेलवे के वाणिज्यिक विभाग में पुनर्वास या वैकल्पिक दुकान देने की कोई नीति नहीं है।

रिट अपील खारिज

हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक किसी भूमि पर कब्जा रहने से स्वामित्व या स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। एकल पीठ के आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार किया और रिट अपील को खारिज कर दिया।

 

अदालत ने आदेश दिया कि यह मामला भी पूर्व में दिए गए निर्णय के अनुरूप निस्तारित माना जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!