
सक्ती। सक्ती जिले में संचालित बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राखड़) अब ग्रामीणों के लिए एक गंभीर अभिशाप बनती जा रही है। पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर समतलीकरण और गड्ढा भराव के नाम पर जहरीली राखड़ को खेतों, खाली जमीनों और सड़कों के किनारे खुलेआम डंप किया जा रहा है, जिससे जनजीवन, कृषि और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
मामला हसौद तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गुंजियाबोड़ का है, जहां सोन नदी से मात्र 45 मीटर की दूरी पर बड़े पैमाने पर राखड़ डाली जा रही है। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन है और भविष्य में बड़े पारिस्थितिक संकट को जन्म दे सकती है।
बरसात में नदी और फसलों पर संकट
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में यह राखड़ बहकर सोन नदी में मिलेगी, जिससे नदी का जल प्रदूषित होगा और आसपास के गांवों में पीने व सिंचाई के पानी पर संकट खड़ा हो जाएगा। यदि यही राखड़ खेतों तक पहुंची, तो धान सहित अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
गर्मी में उड़ती राखड़ बन रही बीमारी की वजह
गर्मी के दिनों में यही राखड़ उड़कर रिहायशी इलाकों में फैल जाती है। हवा में जहरीले कण घुलने से लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, खांसी और त्वचा संबंधी रोग होने लगे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
सड़कों पर राखड़, हादसों का खतरा
क्षेत्र की सड़कों पर राखड़ की मोटी परत जम गई है। तेज हवा चलने पर सड़क पर धुंध जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे वाहन चालकों की दृश्यता कम हो जाती है। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। ओवरलोड ट्रकों से गिरती राखड़ सड़क हादसों को न्योता दे रही है।
विभागों की चुप्पी से बढ़ रहा संकट
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों की निष्क्रियता के कारण अवैध राखड़ डंपिंग और ओवरलोड परिवहन बेरोकटोक जारी है। बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अवैध राखड़ डंपिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए, ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए, पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए ताकि सोन नदी, खेतों और आम जनता के स्वास्थ्य को बचाया जा सके।




