
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय टीम के ऐलान के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा में भी संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के स्वास्थ्य लाभ पर रहने के बीच पार्टी संगठन के कामकाज को गति देने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अटकलें तेज हैं।
कार्यकारी अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम
भाजपा के राजनीतिक और संगठनात्मक गलियारों में संतोष पांडेय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। राजनांदगांव से लगातार दूसरी बार सांसद संतोष पांडेय प्रदेश महामंत्री सहित संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
वहीं पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शिवरतन शर्मा के नाम की भी चर्चा है। संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें भी संभावित दावेदार माना जा रहा है।
महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी का नाम भी चर्चा में था, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए अन्य नामों पर फोकस बढ़ गया है।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन भी अहम
कार्यकारी अध्यक्ष के चयन में भाजपा नेतृत्व के सामने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती भी होगी। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव बस्तर क्षेत्र से आते हैं, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में मैदानी क्षेत्र से किसी अनुभवी नेता को संगठन की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर भी चर्चा है।
संतोष पांडेय का केंद्रीय नेतृत्व से बेहतर समन्वय और शिवरतन शर्मा की जमीनी संगठन पर पकड़, दोनों ही पहलुओं को पार्टी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किरण सिंह देव की भूमिका पर भी नजर
इधर, किरण सिंह देव के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उनकी संभावित भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में सरकार और संगठन के स्तर पर उन्हें नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
छत्तीसगढ़ को जल्द मिल सकता है नया प्रदेश प्रभारी
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन के छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी पद से हटने के चलते अब राज्य के लिए नए प्रभारी की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण हो गई है। केंद्रीय संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब छत्तीसगढ़ भाजपा को नए प्रदेश प्रभारी का इंतजार है।
फिलहाल भाजपा के भीतर संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी की निगाहें केंद्रीय नेतृत्व के आगामी फैसलों पर टिकी हुई हैं।




