जनसंपर्क निधि की सूची पर सियासी सवाल, बसपा से जुड़े लोगों को राशि दिए जाने की चर्चा से भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी

पामगढ़। वर्ष 2026-27 की जनसंपर्क निधि की अनुशंसा सूची सामने आने के बाद पामगढ़ क्षेत्र में इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। जारी दस्तावेज के अनुसार पामगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 69 लोगों के नाम पर कुल 3 लाख 35 हजार रुपये की जनसंपर्क राशि की अनुशंसा की गई है। सूची में अलग-अलग लोगों के लिए 3 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक की राशि दर्ज है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा सामने आई कि जनसंपर्क कार्य के नाम पर जारी राशि में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जुड़ा बताया जा रहा है। इसे लेकर भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी की चर्चा है। हालांकि, संबंधित लाभार्थियों की राजनीतिक संबद्धता का उल्लेख जारी सरकारी सूची में नहीं है, इसलिए इस संबंध में स्वतंत्र एवं अधिकृत पुष्टि आवश्यक है।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उठ रहे सवाल
स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठाया जा रहा है कि यदि जनसंपर्क निधि का उद्देश्य जनसंपर्क गतिविधियों से जुड़े लोगों को सहायता देना है, तो लाभार्थियों के चयन का आधार क्या रहा और उनकी पात्रता का निर्धारण किस प्रक्रिया से किया गया?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय रहते हैं। ऐसे में पार्टी से अलग राजनीतिक विचारधारा से जुड़े बताए जा रहे लोगों के नाम पर जनसंपर्क राशि की अनुशंसा होने की चर्चा ने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को जन्म दिया है।
69 नाम, 3.35 लाख रुपये की अनुशंसा
जारी सूची में पामगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों के कुल 69 लाभार्थियों के नाम दर्ज हैं। कई लोगों के लिए ₹3,000, ₹5,000 तथा कुछ के लिए ₹8,000 और ₹10,000 की राशि दर्शाई गई है। सूची में कुल राशि ₹3,35,000 दर्ज है।
दस्तावेज में जनसंपर्क अनुदान के साथ लाभार्थी का नाम, गांव, पिता/पति का नाम और राशि का विवरण दिया गया है। वहीं संबंधित अधिकारियों को राशि का नियमानुसार भुगतान कराने तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पात्रता और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जनसंपर्क निधि के लिए चयन का मापदंड क्या था? लाभार्थियों का चयन किस स्तर पर हुआ? क्या सभी लाभार्थियों के जनसंपर्क कार्य का कोई रिकॉर्ड या सत्यापन किया गया? और यदि राजनीतिक सक्रियता चयन का आधार नहीं है, तो राशि वितरण का वास्तविक आधार क्या रहा?
भाजपा से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ताओं की ओर से मांग उठाई जा रही है कि लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया और जनसंपर्क निधि वितरण का आधार स्पष्ट किया जाए, ताकि कार्यकर्ताओं के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
दस्तावेज में यह भी निर्देशित है कि जनसंपर्क अनुदान राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए तथा व्यय राशि का मिलान और उपयोगिता संबंधी प्रक्रिया पूरी की जाए। ऐसे में राशि के वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों की पात्रता को लेकर पारदर्शिता की मांग भी सामने आ रही है।
फिलहाल जनसंपर्क निधि की सूची को लेकर पामगढ़ में सियासी चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि भाजपा संगठन, संबंधित जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और क्या लाभार्थियों के चयन एवं राशि वितरण की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाता है।



