9 घंटे बाद खत्म हुआ ऐतिहासिक चक्काजाम, प्रशासन के लिखित आश्वासन पर टूटा आमरण अनशन

अपर कलेक्टर की मौजूदगी में बनी सहमति, 30–34 लाख से होगी सड़क की मरम्मत, आंदोलनकारी अजय साहू की बिगड़ी तबीयत, अपोलो बिलासपुर रेफर
पामगढ़। ग्राम डोंगाकोहरौद की वर्षों पुरानी जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा चलाया जा रहा जनआंदोलन शुक्रवार को बड़ी सफलता के साथ समाप्त हो गया। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ चक्काजाम लगातार 9 घंटे तक जारी रहा, जिससे पामगढ़–शिवरीनारायण–बिलासपुर मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद रहा। आंदोलन को पामगढ़ के व्यापारियों का भी व्यापक समर्थन मिला और नगर बंद रखकर ग्रामीणों के संघर्ष में सहभागिता निभाई गई।
शाम को अपर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आंदोलनकारियों के साथ लंबी चर्चा हुई। कई दौर की बातचीत के बाद प्रशासन ने लिखित कार्यवाही विवरण जारी कर ग्रामीणों की प्रमुख मांगों पर सहमति व्यक्त की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 30 से 34 लाख रुपये की लागत से सड़क की तत्काल मरम्मत का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही सड़क के स्थायी निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा तथा स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। सड़क किनारे स्थित 21 खातेदारों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से भूमि त्याग की प्रक्रिया भी कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त सड़क की सुरक्षा और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक भारी मालवाहक वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाने का भी निर्णय लिया गया।
प्रशासन के लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई के भरोसे पर ग्रामीणों ने करीब 9 घंटे से जारी चक्काजाम समाप्त कर दिया। इसके साथ ही पिछले पांच दिनों से चल रहा आमरण अनशन भी समाप्त हो गया, जिसके बाद मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया।
हालांकि आंदोलन के समापन के तुरंत बाद एक चिंताजनक स्थिति भी सामने आई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अजय साहू की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए अपोलो अस्पताल, बिलासपुर रेफर कर दिया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन समाप्त किया गया है। यदि तय समय सीमा में सड़क मरम्मत और स्थायी निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो भविष्य में इससे भी बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।




