छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

 

किसानों के खेतों में आजीविका डबरी और जल संरचनाओं का निर्माण, भूजल संवर्धन के साथ मनरेगा से पर्यावरण संतुलन को मिल रही मजबूती

जांजगीर-चांपा 04 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिला पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन की दिशा में किए जा रहे कार्यों के चलते प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है। मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, वृक्षारोपण तथा जनभागीदारी आधारित गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। किसानों के खेतों में डबरी (फार्म पोंड), तथा अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही “जल संचय जनभागीदारी” अभियान के तहत सोक पिट निर्माण एवं रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का व्यापक विकास किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिल रही है।

जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गोकुल रावटे ने बताया कि जिले में कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में जिले में जल संचय जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत ग्रामीण एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से विभिन्न जनपद पंचायतों में सोक पिट निर्माण के उल्लेखनीय कार्य पूर्ण किए गए हैं। अकलतरा में 10042, बलौदा में 2840, बम्हनीडीह में 3262, नवागढ़ में 2167 तथा पामगढ़ में 1945 सोक पिट निर्माण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। इस प्रकार जिले में कुल 20256 सोक पिट निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं, जबकि कई कार्य प्रगति पर हैं। इसी प्रकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं के निर्माण कार्य किये गये है। अकलतरा में 95 बम्हनीडीह में 55 नवागढ़ में 120 तथा पामगढ़ में 58 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। कुल 328 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार की गई हैं।

जल संचय जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विकासखंडों में 23 नवा तरिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने एवं जल उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में 58 आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें अकलतरा में 15, बम्हनीडीह में 6, बलौदा में 16, नवागढ़ में 9 तथा पामगढ़ में 12 आजीविका डबरी शामिल हैं। महात्मा गांधी नरेगा के तहत वृक्षारोपण कार्य किए गए हैं। इसके अलावा तालाब गहरीकरण, कुंआ निर्माण, कच्ची नाली निर्माण आदि जलसंरक्षण के संबंधित स्वीकृत किये जा रहे है। इन सभी कार्यों के माध्यम से जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार, जैव विविधता संवर्धन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। आजीविका डबरी के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

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