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ग्राम पंचायत चण्डीपारा में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, ग्रामीणों को कानूनी अधिकारों एवं योजनाओं की दी गई जानकारी

पामगढ़, 14 जून 2026। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष एवं माननीय प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जयदीप गर्ग तथा सचिव श्री मनोज कुमार कुशवाहा के निर्देशानुसार एवं तालुका विधिक सेवा समिति पामगढ़ की अध्यक्ष एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती शीलू केसरी के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत चण्डीपारा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकारों, कर्तव्यों एवं न्याय प्राप्ति की सरल प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना था।

शिविर में पैरालीगल वालंटियर (पीएलवी) गजानंद प्रसाद कश्यप ने उपस्थित ग्रामीणों को आगामी 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय परिसर में आयोजित होने वाले “समाधान समारोह” की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त प्रकरणों का आपसी सहमति एवं सुलह के माध्यम से त्वरित निराकरण करना है। इसके लिए संबंधित पक्षों के मध्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से लगातार सुलह प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

उन्होंने विशेष लोक अदालत, चेक बाउंस मामलों के निराकरण हेतु 18 जुलाई एवं 21 नवंबर 2026 को आयोजित विशेष अभियान, राष्ट्रीय लोक अदालत (12 सितंबर 2026), निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं, नालसा हेल्पलाइन 15100 तथा महिला हेल्पलाइन 1091 के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर पीएलवी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने ग्रामीणों को मोटर वाहन अधिनियम, प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर), महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, विभिन्न शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं तथा न्याय प्राप्ति के उपलब्ध साधनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों एवं कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी होना आवश्यक है, जिससे वे समय पर न्याय प्राप्त कर सकें।

शिविर में नरेश भार्गव, मोहम्मद खान यासिनी, पुष्कर भार्गव, कुमारी रात्रे, रामकुमारी साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कानूनी विषयों से जुड़े प्रश्न भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे विधिक सेवाओं एवं शासन द्वारा संचालित सहायता योजनाओं का लाभ उठाते हुए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें तथा समाज में कानूनी साक्षरता बढ़ाने में सहयोग करें।

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