शिवरीनारायण मेला बना मौत का जाल, नगर पंचायत CMO के संरक्षण में चल रहा था अवैध आकाश झूला, टूटने से दो युवतियां गंभीर

देवेन्द्र यादव, रायपुर / शिवरीनारायण शिवरीनारायण में चल रहे प्रसिद्ध माघी मेले में सुरक्षा व्यवस्था की घोर अनदेखी एक बार फिर सामने आई है। मेले में संचालित आकाश झूला अचानक टूट जाने से दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह हादसा न केवल झूला संचालकों की लापरवाही, बल्कि नगर पंचायत शिवरीनारायण और उसके CMO की सीधी जिम्मेदारी को उजागर करता है।
नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक मेले में झूला लगाने से पहले नगर पंचायत की लिखित अनुमति, तकनीकी फिटनेस प्रमाणपत्र, PWD एवं विद्युत विभाग की संयुक्त जांच तथा थर्ड पार्टी व दुर्घटना बीमा अनिवार्य होता है। लेकिन शिवरीनारायण मेले में इन सभी नियमों को ताक पर रखकर आकाश झूला संचालित किया जा रहा था।
कागजों में फिटनेस, ज़मीन पर मौत का खेल
सूत्रों के अनुसार झूले का न तो कोई वैध फिटनेस प्रमाणपत्र था और न ही अनिवार्य बीमा कराया गया था। नियमों के मुताबिक झूले की कुर्सी, चैन, वेल्डिंग, बोल्ट, ब्रेक सिस्टम आदि की इंजीनियर द्वारा तकनीकी जांच आवश्यक होती है, लेकिन यह सब केवल कागजों तक सीमित रहा।
सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड भी नदारद
झूले के आसपास न तो बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। प्रशिक्षित ऑपरेटर और दैनिक निरीक्षण की व्यवस्था भी नहीं थी। इसी लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ, जिसमें दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हुईं।
नगर पंचायत CMO की भूमिका पर गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत शिवरीनारायण द्वारा झूला संचालकों से मोटी रकम लेकर आंख मूंदकर अनुमति दी जाती है। सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर केवल राजस्व वसूली पर ध्यान दिया जा रहा है।
हादसे के बाद जब नगर पंचायत CMO से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस गंभीर घटना की जानकारी से ही इनकार कर दिया, जो उनकी कार्यशैली और जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
बीमा था या नहीं? 15 दिन का प्रीमियम भी सवालों में
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस झूले से हादसा हुआ, क्या उसका 15 दिवसीय प्रीमियम बीमा भी कराया गया था या फिर नगर पंचायत के संरक्षण में एक “मौत का झूला” जनता की जान से खेल रहा था?
जनता की मांग – दोषियों पर हो आपराधिक कार्रवाई
हादसे के बाद जनता में भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि नगर पंचायत CMO, संबंधित जांच अधिकारी और झूला संचालक के खिलाफ तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए तथा पूरे मेला परिसर में लगे सभी झूलों, मौत के कुएं और अन्य मनोरंजन साधनों की दोबारा तकनीकी जांच कराई जाए।
शिवरीनारायण मेला हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और नागरिकों को आकर्षित करता है, लेकिन अगर सुरक्षा ही मज़ाक बन जाए तो यह मेला आस्था नहीं, मौत का बाजार बन जाएगा। अब देखना यह है कि इस हादसे के बाद प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर एक और घटना का इंतज़ार किया जाएगा।




