
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने डीपी विप्र कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर सोनल तिवारी की बर्खास्तगी को अवैध करार देते हुए कॉलेज प्रबंधन के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की बेंच ने निर्देश दिया कि सोनल तिवारी को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए और वर्ष 2019 से अब तक का पूरा वेतन व सभी लाभ प्रदान किए जाएं।
दरअसल, सोनल तिवारी को वर्ष 2018 में तत्कालीन प्रिंसिपल की शिकायत पर निलंबित किया गया था, जिसके बाद 14 मई 2019 को कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इस फैसले को उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी में चुनौती दी, लेकिन राहत न मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि कॉलेज प्रबंधन ने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार किसी भी शिक्षक की सेवा समाप्त करने से पहले यूनिवर्सिटी की कार्यकारिणी परिषद की अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई थी। इस आधार पर कोर्ट ने प्रबंधन का निर्णय खारिज कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी:
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी की कोई गलती नहीं है और उसे जबरन काम से दूर रखा गया है, तो वह पूर्ण वेतन पाने का हकदार होता है।
इस मामले में सोनल तिवारी ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न प्रस्तुत कर यह साबित किया कि बर्खास्तगी के दौरान वे किसी अन्य संस्था में कार्यरत नहीं थीं और उनकी आय का कोई अन्य स्रोत नहीं था।



