जनचौपाल में विपक्षी विधायक को रोकने का आरोप: पामगढ़ में सियासी बवाल, प्रशासन पर लोकतंत्र के अपमान के गंभीर आरोप

विधायक शेषराज हरवंश ने कलेक्टर-एसपी पर लगाए गंभीर आरोप, पूछा क्या सरकारी कार्यक्रम अब केवल सत्ता पक्ष के लिए?
पामगढ़। छत्तीसगढ़ के पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोसला में आयोजित मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनचौपाल कार्यक्रम को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय विधायक श्रीमती शेषराज हरवंश ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का खुला अपमान है।
विधायक ने जारी बयान में कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर ग्राम कोसला पहुंची थीं, जहां मुख्यमंत्री का जनचौपाल कार्यक्रम आयोजित था। आरोप है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले उन्हें जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का फोन आया, जिसमें कहा गया कि यह “गोपनीय कार्यक्रम” है और उनका वहां मौजूद रहना “उचित नहीं” होगा।
विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कार्यक्रम वास्तव में गोपनीय था, तो सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता वहां पहले से कैसे मौजूद थे? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रम को राजनीतिक दल विशेष के आयोजन की तरह संचालित किया जा रहा है।
विधायक ने सरकार और प्रशासन से पूछे कई तीखे सवाल
विधायक शेषराज हरवंश ने इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई सवाल उठाए —
- क्या एक निर्वाचित विपक्षी विधायक को सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप है?
- क्या यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई या प्रशासन ने सत्ता पक्ष को खुश करने के लिए ऐसा कदम उठाया?
- क्या जनचौपाल जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अब केवल सत्ताधारी दल के लोगों को ही अनुमति दी जाएगी?
- क्या विपक्षी जनप्रतिनिधियों को अपमानित करना अब नई राजनीतिक संस्कृति बनती जा रही है?
“यह केवल मेरा नहीं, पामगढ़ की जनता का अपमान”
विधायक ने कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि पामगढ़ विधानसभा की जनता की आवाज को दबाने का प्रयास बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की मौजूदगी और जनता के वास्तविक मुद्दों से बचना चाहती है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष की आवाज को इसी तरह दबाया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत साबित होगा।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की प्रतिक्रिया और जिला प्रशासन पर संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विधायक शेषराज हरवंश ने जारी किया बयान, देखें क्या कहा…




