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शहर विकास और स्वच्छता में बाधा, मणीकंचन केंद्र निर्माण कार्य दोबारा रुका

54 लाख की स्वच्छता परियोजना लगातार विरोध के कारण अटकी, प्रशासन सोमवार को करेगा उच्चस्तरीय बैठक

पामगढ़। नवगठित नगर पंचायत पामगढ़ में शहर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा प्रस्तावित मणीकंचन केंद्र निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों में घिर गया है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं कचरे के पृथक्करण (सेग्रीगेशन) के लिए लगभग 54 लाख रुपए की लागत से बनने वाले इस महत्वपूर्ण केंद्र का निर्माण लगातार विरोध के चलते शुरू नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार लगभग तीन माह पूर्व नगर पंचायत परिषद द्वारा वार्ड क्रमांक 01 के गढ़ क्षेत्र अंतर्गत चण्डीपारा से लगी शासकीय भूमि का चयन मणीकंचन केंद्र निर्माण के लिए किया गया था। चयनित स्थल पर नगर पंचायत प्रशासन द्वारा लेआउट की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही थी, तभी कुछ जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन को उस समय कार्य स्थगित करना पड़ा।

इसके बाद नगर पंचायत परिषद एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा आपसी चर्चा के पश्चात नए स्थल के रूप में वार्ड क्रमांक 07 स्थित शासकीय खसरा नंबर 680/1 की भूमि का चयन किया गया। प्रशासन को उम्मीद थी कि नए स्थल पर सहमति बनने के बाद निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो जाएगा।

इसी क्रम में शुक्रवार को नगर पंचायत पामगढ़ के सीएमओ, इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, राजस्व विभाग के हल्का पटवारी, नगर पंचायत उपाध्यक्ष एवं अन्य पार्षदों की मौजूदगी में स्थल पर लेआउट कार्य प्रारंभ करने की प्रक्रिया की जा रही थी। लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद कुछ स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

विरोध के चलते मौके पर विवाद एवं तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समझाइश देकर स्थिति को शांत कराने और कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार विरोध के कारण लेआउट कार्य को पुनः रोकना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन द्वारा पुलिस बल भी बुलाया गया ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

सूत्रों के अनुसार संबंधित पार्षद द्वारा पूर्व में चयनित स्थल का भी विरोध किया गया था तथा अब नए स्थल पर भी आपत्ति जताई जा रही है। लगातार विरोध के कारण नगर पंचायत की स्वच्छता से जुड़ी यह महत्वपूर्ण योजना प्रभावित हो रही है।

नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि शासन की इस योजना का उद्देश्य नगर क्षेत्र को स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं आधुनिक बनाना है, लेकिन बार-बार निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न होने से परियोजना समय पर प्रारंभ नहीं हो पा रही है। उल्लेखनीय है कि उक्त निर्माण कार्य हेतु दिसंबर 2025 में ही कार्यादेश जारी किया जा चुका है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोमवार को उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी तथा सभी कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

नगर पंचायत प्रशासन का मानना है कि शहर विकास, स्वच्छता एवं जनहित से जुड़ी योजनाओं को राजनीतिक विरोध से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए, ताकि नगरवासियों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

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