
पामगढ़। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर डॉ. राजाराम बनर्जी ने अपनी विभिन्न शिक्षाप्रद कृतियां पामगढ़ के एसडीएम श्री आर.के. तंबोली को भेंट कीं। इस अवसर पर एसडीएम ने डॉ. बनर्जी के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
पामगढ़ क्षेत्र के ग्राम जोरैला में जन्मे डॉ. बनर्जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिलौनी तथा माध्यमिक शिक्षा डोंगाकोहरौद से प्राप्त की। अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर उन्होंने उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया और वर्तमान में शासकीय महाविद्यालय बलौदा में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. बनर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल करते हुए पामगढ़ में छत्तीसगढ़ ज्ञान ज्योति हायर सेकेंडरी स्कूल एवं कर्मफल पब्लिक स्कूल की स्थापना की, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने संत शिरोमणि गुरु घासीदास महाविद्यालय की स्थापना कर उच्च शिक्षा के अवसर भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए हैं।
सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। इंडियन सतनामी समाज ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समाजोत्थान से जुड़े विभिन्न कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
साहित्य के क्षेत्र में भी डॉ. बनर्जी की विशिष्ट पहचान है। अब तक वे 9 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं, 20 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं तथा 40 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में सहभागिता निभा चुके हैं। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय एजुकेशन आइडल प्राइड अचीवर्स अवार्ड, ग्लोबल विभूति आइकॉन अचीवर्स अवार्ड, अंतरराष्ट्रीय साहित्य वाचस्पति पुरस्कार, डॉ. भीमराव अंबेडकर सम्मान एवं ज्ञान ज्योति सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ. राजाराम बनर्जी निरंतर शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपनी कृतियों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।




