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1500 विद्यार्थियों की प्यास से बेखबर जिम्मेदार: स्वामी आत्मानंद स्कूल पामगढ़ में पेयजल संकट गहराया, पंप ड्राई होने के बाद भी पीएचई विभाग मौन

बोरवेल सूखा, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं; भीषण गर्मी और उमस में बच्चों को पीने के पानी के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

पामगढ़ :- शासन द्वारा प्रदेश के स्वामी आत्मानंद विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पामगढ़ स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। लगभग 1500 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट बन गई है। विद्यालय परिसर में लगा मुख्य बोरवेल (पंप) पूरी तरह ड्राई हो चुका है, जिसके कारण बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई प्रभावी पहल करते दिखाई नहीं दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार विद्यालय में प्रतिदिन करीब डेढ़ हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच बच्चों को दिनभर विद्यालय में रहना पड़ता है, लेकिन उनकी सबसे बुनियादी आवश्यकता पीने का पानी ही पूरी नहीं हो पा रही है। विद्यालय का बोरवेल सूख जाने के बाद से विद्यार्थियों और शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बच्चों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है या सीमित संसाधनों से काम चलाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा समस्या की जानकारी संबंधित विभागों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो नए बोरवेल की स्वीकृति मिली है और न ही वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर 1500 बच्चों की मूलभूत जरूरतों के प्रति विभागीय जिम्मेदारों की संवेदनशीलता आखिर कहां है?

अभिभावकों का कहना है कि शासन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को मॉडल स्कूल बनाने की बात करता है, लेकिन जब विद्यालय में पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो ऐसी योजनाओं का उद्देश्य अधूरा प्रतीत होता है। उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार पर्याप्त पानी नहीं मिलने से बच्चों में डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर आना और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात के मौसम में भी स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि पीएचई विभाग की लापरवाही के कारण समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यदि विभाग समय रहते नया बोर खनन कराता या वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था करता तो आज हजारों विद्यार्थियों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों का कहना है कि विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं।

अभिभावकों एवं नागरिकों ने जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी तथा पीएचई विभाग से मांग की है कि विद्यालय में तत्काल नया बोरवेल स्वीकृत कर उसका खनन कराया जाए, स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा तब तक टैंकर या अन्य माध्यम से नियमित जलापूर्ति की जाए।

नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो विद्यार्थियों के हित में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी है, इससे किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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