
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर जारी अपने ही आदेश को महज़ 24 घंटे के भीतर स्थगित कर दिया है। इस अचानक फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने एक दिन पहले ही सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए साफ कहा था कि कोई भी शासकीय कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं बनेगा और न ही किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कोई कर्मचारी किसी भी शासकीय या गैर-शासकीय संस्था, समिति या संगठन में पद नहीं संभालेगा। साथ ही ऐसे किसी दायित्व को स्वीकार करने पर भी रोक लगाई गई थी, जिससे उसकी प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती हो। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि, आदेश जारी होने के अगले ही दिन सामान्य प्रशासन विभाग ने नया पत्र जारी कर इन सभी निर्देशों को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। इस त्वरित बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—खासतौर पर यह कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को इतनी जल्दी अपने फैसले से पीछे हटना पड़ा।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का दौर जारी है।




